तजरबा इंतख़ाबों का रहा है बस यही अब तक

तजरबा इंतख़ाबों का रहा है बस यही अब तक चुना है रहनुमा जिसको वही निकला मदारी है। -शंभु शरण मंडल #HindiSahitya

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