स्त्रियां कभी नहीं मांगती अपने हिस्से का प्रेम
स्त्रियां कभी नहीं मांगती अपने हिस्से का प्रेम वो बस चाहती है उनके प्रेम को स्वीकारा जाना पुरुष कभी नहीं मांगते अपने प्रेम के बदले प्रेम, वो चाहते है केवल उन्हें समझा जाना। ✍️ स्वाति यादव, साहित्य दृष्टि
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