यह उपन्यास जीवन और मृत्यु के बीच की उन खामोश दरारों को खोलता है जहां रिश्ते धीरे-धीरे टूटते हैं और शब्द चुप…

यह उपन्यास जीवन और मृत्यु के बीच की उन खामोश दरारों को खोलता है जहां रिश्ते धीरे-धीरे टूटते हैं और शब्द चुप हो जाते हैं। यह सिर्फ मृत्यु का दर्शन नहीं बल्कि इंसानी अकेलेपन, बिखरते संबंधों और भीतर चलती अनकही बेचैनियों की गहरी व्याख्या है।

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