औरत अक्सर रिश्ते से नहीं, उस रिश्ते में देखे गए अपने ख़्वाबों से बंधी होती है
औरत अक्सर रिश्ते से नहीं, उस रिश्ते में देखे गए अपने ख़्वाबों से बंधी होती है...और ख़्वाब टूट जाएँ तो भी वे उन्हें छोड़ने में बहुत देर करती है। और मर्द... मर्द एक आवारा कुत्ते की तरह होता है, यूँ तो फ़ितरतन इधर-उधर हड्डियाँ तलाशता फिरता है मगर किसी एक आँगन से वफ़ादार हो जाए तो फिर उस चौखट पर अपनी तमाम उम्र ख़ाक कर देता है।
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