तमिलनाडु की राजनीति में हालिया घटनाक्रम ने भारतीय जनता पार्टी के लिए नई चिंता खड़ी कर दी है। थलपति विजय की…

तमिलनाडु की राजनीति में हालिया घटनाक्रम ने भारतीय जनता पार्टी के लिए नई चिंता खड़ी कर दी है। थलपति विजय की अगुवाई वाली टीवीके की बढ़ती लोकप्रियता और बीजेपी के कमजोर प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि दक्षिण भारत में पार्टी अभी भी मजबूत जनाधार बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। इसी बीच तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और फायरब्रांड नेता के. अन्नामलाई का इस्तीफा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अन्नामलाई को बीजेपी दक्षिण भारत में एक मजबूत चेहरे के रूप में पेश कर रही थी। पूर्व आईपीएस अधिकारी होने के कारण उनकी छवि आक्रामक और साफ-सुथरी रही लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ दलों का प्रभाव आज भी बेहद मजबत है। बीजेपी उत्तर भारत में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की राजनीति के जरिए बड़ी सफलता हासिल कर चुकी है, लेकिन दक्षिण भारत की सामाजिक, भाषाई और सांस्कृतिक राजनीति अलग प्रकृति की है। तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में क्षेत्रीय पहचान और स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति पर भारी पड़ते हैं। यही कारण है कि बीजेपी को यहां अभी भी व्यापक जनसमर्थन नहीं मिल पा रहा। अन्नामलाई के संभावित नए राजनीतिक कदम को भी इसी असंतोष और राजनीतिक खालीपन से जोड़कर देखा जा रहा है। #KAnnamalai #BJP #Delhi #Politics

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