कितना अजीब है इंसान चले जाते हैं दरवाज़ें इंतिजार में ज़िंदा रहते हैं। इस फीके नीले रंग में एक ज़िद बची हुई…

कितना अजीब है इंसान चले जाते हैं दरवाज़ें इंतिजार में ज़िंदा रहते हैं। इस फीके नीले रंग में एक ज़िद बची हुई है कि उजड़ जाने के बाद भी घर, घर ही रहता है।

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