लाल किले पर कवि सम्मेलन हो रहा था।
लाल किले पर कवि सम्मेलन हो रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे, और भारत के राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ भी कविता पाठ के लिए आमंत्रित थे। मंच पूरी तरह तैयार था। पंडित नेहरू और दिनकर जी मंच की सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे। इतने में एकाएक पंडित नेहरू का पाँव डगमगा गया, और दिनकर जी ने तुरंत उनका हाथ पकड़कर उन्हें संभाल लिया। इस पर नेहरू जी ने कहा – “धन्यवाद दिनकर जी, आपने मुझे संभाल लिया।” इसके उत्तर में दिनकर जी मुस्कराए और बोले “इसमें धन्यवाद की कोई बात नहीं है नेहरू जी, राजनीति जब-जब लड़खड़ाती है, साहित्य उसे संभालता है।”
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