तुम मेरे दोस्त हो सकते हो, मेरे दुश्मन हो सकते हो, या फिर तुम मेरे कोई और हो सकते हो। तुम मेरे लिए मोहब्बत हो…

तुम मेरे दोस्त हो सकते हो, मेरे दुश्मन हो सकते हो, या फिर तुम मेरे कोई और हो सकते हो। तुम मेरे लिए मोहब्बत हो सकते हो, नफ़रत हो सकते हो, कोई पुराना रिश्ता हो सकते हो, कोई अधूरा ख़्वाब या फिर कोई ऐसी याद, जिससे निकलने की कोशिश में मैंने कई रातें गुज़ार दी हों। तुम मेरी ख़ुशी की वजह हो सकते हो, मेरे दुख का सबब हो सकते हो, मेरी किसी कहानी का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा या फिर वह पन्ना, जिसे मैं बार-बार पलटकर भी पढ़ना नहीं चाहता। तुम मेरे क़रीब हो सकते हो, मुझसे दूर हो सकते हो। मेरी ख़ामोशी में शामिल हो सकते हो, मेरी बातों में ज़िक्र बनकर आ सकते हो। तुम मेरे लिए बहुत कुछ हो सकते हो। इतना कुछ कि तुम्हें किसी एक नाम, किसी एक रिश्ते या किसी एक एहसास में बाँधना मुमकिन न हो। लेकिन इन सबके बावजूद, तुम मेरे कुछ भी नहीं हो। क्योंकि तुम्हारा होना और तुम्हारा मेरे लिए होना, दो अलग-अलग बातें हैं। तुम अपनी जगह मौजूद हो, अपनी दुनिया में ज़िंदा हो, अपनी ख़ुशियों और परेशानियों के साथ आगे बढ़ रहे हो। मगर मेरी दुनिया में तुम्हारी जो भी हैसियत है, वो मेरे एहसासों से बनी है। और एहसासों की दुनिया में किसी का बहुत कुछ होना भी ज़रूरी नहीं कि उसकी कोई हक़ीक़त हो। तुम मेरे लिए एक पूरी कहानी हो सकते हो, मगर तुम्हारी अपनी कहानी में शायद मेरा कोई ज़िक्र तक न हो। तुम मुझे याद कर सकते हो, भूल सकते हो, अपना समझ सकते हो या अजनबी की तरह गुज़र सकते हो। तुम्हें हर बात की आज़ादी है। और मुझे इस बात की आज़ादी है कि मैं तुम्हें कुछ भी मानने से इनकार कर दूँ। आख़िरकार, तुम वही हो जो तुम हो। न उससे ज़्यादा, न उससे कम। बाक़ी जो कुछ भी हो, वो शायद मेरे भीतर तुम्हारा बनाया हुआ एक ख़याल है। -निराला

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