तुम बंजर हो जाओगे यदि इतने व्यवस्थित ढंग से रहोगे यदि इतने सोच समझकर बोलोगे चलोगे कभी मन की नहीं कहोगे सच को…

तुम बंजर हो जाओगे यदि इतने व्यवस्थित ढंग से रहोगे यदि इतने सोच समझकर बोलोगे चलोगे कभी मन की नहीं कहोगे सच को दबाकर झूठे प्रेम के गाने गाओगे तो मैं तुमसे कहता हूँ, तुम बंजर हो जाओगे! भवानी प्रसाद मिश्र

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