हर पीड़ा दिखाई नहीं देती।

हर पीड़ा दिखाई नहीं देती। कुछ लोग अपनी पसंद के कपड़े पहनना छोड़ देते हैं, कुछ अपनी तस्वीरें लेना छोड़ देते हैं। जिन्हें कभी घूमना बहुत पसंद था, वे आज अकेले घर में रहना पसंद करने लगते हैं। जो लोग कभी घंटों बातें किया करते थे, वे अचानक बिल्कुल शांत हो जाते हैं। कुछ लोग खुद को काम की व्यस्तता में इतना झोंक देते हैं कि उन्हें अपने दर्द के बारे में सोचने का वक्त ही न मिले। कुछ लोग अपनी पूरी ज़िंदगी रिश्तों के हवाले कर देते हैं और धीरे-धीरे खुद को ही भूल जाते हैं। जो लोग कभी हर किसी को प्यार और care दिया करते थे, वे आज भीड़ में रहकर भी अकेले जीने लगते हैं। हर दर्द चीखकर नहीं बताता कि वह दर्द में है। हर उदासी आंखों में आंसू बनकर नहीं आती। कुछ लोग अपने भीतर चल रही लड़ाइयों के बारे में किसी से कुछ नहीं कहते और बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखाई देते हैं। जबकि सच यह होता है कि वे रोज़ थोड़ा-थोड़ा अंदर से टूट रहे होते हैं। इसलिए किसी की खामोशी को सिर्फ़ अहंकार मत समझिए। हर बदला हुआ व्यवहार किसी न किसी कहानी के पीछे छिपा होता है। कभी-कभी इंसान लोगों से इसलिए दूर नहीं होता कि उसे उनकी परवाह नहीं रही, बल्कि इसलिए कि वह खुद के भीतर इतना उलझ चुका होता है कि किसी और के लिए कुछ बचा ही नहीं होता। किसी के बारे में राय बनाने से पहले यह भी सोचिए कि शायद वह उस दौर से गुजर रहा हो, जिसके बारे में वह किसी को बता नहीं पा रहा।

Read on on record.