यह उपन्यास भारतीय मध्यवर्गीय महिलाओं की दयनीय स्थिति, दहेज प्रथा और अनमेल विवाह की त्रासदी को मार्मिक ढंग से…
यह उपन्यास भारतीय मध्यवर्गीय महिलाओं की दयनीय स्थिति, दहेज प्रथा और अनमेल विवाह की त्रासदी को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। निर्मला को हिंदी का पहला मनोवैज्ञानिक और यथार्थवादी उपन्यास माना जाता है, जो समाज सुधार का सशक्त संदेश देता है।
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