“स्त्रीवाद में जब दलित स्त्री को कोई स्थान नहीं मिला तो दलित स्त्रीवाद अस्तित्व में आया।”

“स्त्रीवाद में जब दलित स्त्री को कोई स्थान नहीं मिला तो दलित स्त्रीवाद अस्तित्व में आया।” -हेमलता महिश्वर पुस्तक ‘दलित साहित्य’ (खंड-1) से

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