—तुमने कभी उसे देखा है

—तुमने कभी उसे देखा है? —किसे? —दुख को… मैंने भी नहीं देखा, लेकिन जब तुम्हारी कज़िन यहाँ आती है, मैं उसे छिप कर देखती हूँ। वह यहाँ आकर अकेली बैठ जाती है। पता नहीं, क्या सोचती है और तब मुझे लगता है, शायद यह दुख है! ~निर्मल वर्मा ―एक चीथड़ा सुख 🍀

Read on on record.