प्रेम में केवल प्रेम ही कहाँ होता है। एक प्रेम में सैकड़ों रंग, हजार बातें, लाख इशारे और अनगणित खामोशियाँ होती…

प्रेम में केवल प्रेम ही कहाँ होता है। एक प्रेम में सैकड़ों रंग, हजार बातें, लाख इशारे और अनगणित खामोशियाँ होती हैं। और गजब कि उन सैंकड़ों रंगों में से एक भी छटा उस रंग से नहीं मिलती तो जिससे मन का आंगन रंगा होता है। हजार बातों में एक भी बात वो नहीं होती जो कानों में गूंजती रहती है। लाख इशारे हों लेकिन वो इशारा नहीं होता जो अदृश्य में कौंधता रहता है। और वो अगणित खामोशी, जो शोर मचाकर सपनों को जगाए रखती है, वो तो जाने किस गगन-नाद में खो जाती है। प्रेम में बस प्रेम होता है, बेरंग, गूंगा, अंधा और बहरा। 'बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना, कर बिनु करम करइ बिधि नाना। आनन रहित सकल रस भोगी, बिनु बानी बकता बड़ जोगी।'

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