अमृत राय जी के अनुसार प्रेमचंद जी ने अपने नाम के आगे ‘मुंशी’ शब्द का प्रयोग स्वयं कभी नहीं किया। उनका यह भी…

अमृत राय जी के अनुसार प्रेमचंद जी ने अपने नाम के आगे ‘मुंशी’ शब्द का प्रयोग स्वयं कभी नहीं किया। उनका यह भी मानना है कि मुंशी शब्द सम्मान सूचक है, जिसे प्रेमचंद के प्रशंसकों ने कभी लगा दिया होगा। यह तथ्य अनुमान पर आधारित है। यह बात सही है कि मुंशी शब्द सम्मान सूचक है। यह भी सच है कि कायस्थों के नाम के आगे मुंशी लगाने की परम्परा रही है तथा अध्यापकों को भी ‘मुंशी जी’ कहा जाता था। इसका साक्षी है प्रेमचंद से संबंधित साहित्य। इस सम्बन्ध में प्रेमचंद की धर्म पत्नी ‘शिवरानी देवी’ की पुस्तक ‘प्रेमचंद घर में’ में प्रेमचंद से संबंधित सभी घरेलू बातों की चर्चा शिवरानी देवी ने की है। पूरी पुस्तक में कहीं भी प्रेमचंद के लिए ‘मुंशी’ शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है। इससे स्पष्ट है कि उस समय तक प्रेमचंद के नाम के साथ ‘मुंशी’ का प्रयोग नहीं होता था, और न ही सम्मान स्वरूप लोग उन्हें ‘मुंशी’ ही कहते थे, अन्यथा शिवरानी देवी प्रेमचंद के लिए कहीं न कहीं ‘मुंशी’ विशेषण का प्रयोग अवश्य करतीं। क्यों कि इसी पुस्तक में उन्होंने दया नारायण जी के लिए मुंशी जी शब्द का प्रयोग कई बार किया है परन्तु प्रेमचंद के लिए कहीं भी नहीं।

Read on on record.