भारत की राजनीति में समय-समय पर ऐसे दौर आते रहे हैं जब जनता पारंपरिक दलों से निराश होकर नए विकल्प की तलाश करने…
भारत की राजनीति में समय-समय पर ऐसे दौर आते रहे हैं जब जनता पारंपरिक दलों से निराश होकर नए विकल्प की तलाश करने लगती है। कांग्रेस का लंबे समय तक देश की राजनीति पर प्रभुत्व रहा लेकिन भ्रष्टाचार, वंशवाद और जनता से दूरी जैसे आरोपो ने उसकी छवि को कमजोर किया। 2G, कॉमनवेल्थ और कोलगेट जैसे घोटालों के बाद लोगों में गुस्सा बढ़ा और बदलाव की मांग तेज हुई। भारतीय जनता पार्टी ने इसी असंतोष को अवसर में बदला। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने “विकास”, “राष्ट्रवाद” और “मजबूत नेतृत्व” की राजनीति को आगे बढ़ाया। सोशल मीडिया और मजबूत संगठन के सहारे बीजेपी राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई। इसी दौरान अन्ना आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी ने “ईमानदारी” और “व्यवस्था परिवर्तन” की राजनीति के साथ दिल्ली में जगह बनाई। जनता ने उसे पारंपरिक दलों के विकल्प के रूप में देखा। “कॉकरोच जनता पार्टी” जैसे प्रतीकात्मक विचार उसी व्यवस्था-विरोधी भावना को दर्शाते हैं जो हर दौर में जन्म लेती है। भारतीय राजनीति का इतिहास बताता है कि नए विकल्प हमेशा उभर सकते हैं लेकिन उनकी असली परीक्षा सत्ता में आने के बाद शुरू होती है। कांग्रेस का पतन, बीजेपी का उभार और आम आदमी पार्टी का उदय ये तीनों इस बात के उदाहरण हैं कि भारतीय जनता समय आने पर राजनीति की दिशा बदल सकती है। “कॉकरोच जनता पार्टी” चाहे व्यंग्य हो या नया राजनीतिक रूपक, लेकिन यह उस बेचैनी को जरूर दिखाता है जो आज भी समाज के भीतर मौजूद है। जनता हमेशा ऐसे विकल्प की तलाश में रहती है जो उसे यह भरोसा दिला सके कि बदलाव अभी भी संभव है। शायद भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यहां उम्मीद कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती। #CockroachJantaParty #BJP #Congress #AAP
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