“दुनिया में किसी को पता ही नहीं चला और उसका दुनिया पर कब्ज़ा हो गया। मनुष्य को कानोंकान ख़बर नहीं हुई और जीवन…
“दुनिया में किसी को पता ही नहीं चला और उसका दुनिया पर कब्ज़ा हो गया। मनुष्य को कानोंकान ख़बर नहीं हुई और जीवन पर बाज़ार का पूरा कब्ज़ा हो गया। यह सब कुछ इतने कौशल से हुआ कि स्वयं जीवन को ही अहसास नहीं होने दिया गया कि वह किसी के कब्ज़े में आ गया है। जीवन को तो अपनी पराजय की ख़बर ही नहीं मिली। सब लोग बाज़ार के कब्ज़े में एक-एक करके आते चले गए और किसी को पता ही नहीं चला। न वहाँ दुश्मन के दस्ते उतरे, न कोई बिगुल बजे, न किसी गोला-बारूद का इस्तेमाल हुआ, न ही रणभेरी बजी। बस, कब्ज़ा हो गया।” -ज्ञान चतुर्वेदी(पागलख़ाना)
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