उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भारतीय जनता पार्टी का पारंपरिक मतदाता नहीं माना…
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भारतीय जनता पार्टी का पारंपरिक मतदाता नहीं माना जाता। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं का लाभ समुदाय के कई लोगों तक पहुँचा है। इसके साथ ही भाजपा ने 'पसमांदा' (सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े) मुसलमानों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की भी कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे मुस्लिम समाज के एक सीमित वर्ग में भाजपा के प्रति सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। दूसरी ओर, कांग्रेस और बसपा के कमजोर होने के बाद मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ा रहा है। लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हुई है कि मुस्लिम समाज का एक वर्ग सपा की राजनीति और नेतृत्व को लेकर पहले जैसा उत्साहित नहीं है। इसके पीछे कई कारण गिनाए जाते हैं। रामपुर के वरिष्ठ नेता आज़म खान और उनके परिवार के प्रति पार्टी के रवैये को लेकर समय-समय पर सवाल उठे हैं। वहीं, मुरादाबाद लोकसभा सीट से डॉ. एस. टी. हसन का टिकट काटे जाने के फैसले ने भी मुस्लिम समाज के एक हिस्से में नाराज़गी पैदा की। हाल ही में कमाल अख्तर का अखिलेश यादव के कहने पर विधानसभा में मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना। इन घटनाओं को विपक्षी दल और राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नज़रिए से देखते हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कुछ जनसभाओं में मुस्लिम समुदाय की उल्लेखनीय मौजूदगी भी देखने को मिली है। हालांकि इन घटनाओं का वास्तविक चुनावी असर कितना होगा इसका स्पष्ट जवाब आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजे ही देंगे। #UttarPradesh #UPPolitics #BJP #SamajwadiParty #MuslimVoters #Pasmanda #YogiAdityanath #AkhileshYadav #AzamKhan #STHasan #KamalAkhtar #Election2027 #PoliticalAnalysis
Posted from Buddhi Vihar, UP
Captured 29/6/2026, 7:35:43 am
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