आज एक शानदार ज़िंदगी की शाम हो गई… उर्दू अदब की दुनिया की एक बड़ी शख्सियत बशीर बद्र अब हमारे बीच नहीं रहे।

आज एक शानदार ज़िंदगी की शाम हो गई… उर्दू अदब की दुनिया की एक बड़ी शख्सियत बशीर बद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने मोहब्बत, बिछड़न, इंसानी रिश्तों और मुल्क के बंटवारे के दर्द को अपने अशआर में जिस खूबसूरती से पिरोया, वो हमेशा याद किए जाएंगे। शिमला समझौते के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने पाकिस्तान के Zulfikar Ali Bhutto को बशीर बद्र का यह मशहूर शेर सुनाया था। “दुश्मनी जमके करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त बन जाएं तो शर्मिंदा ना हों।”

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